कान से सीखने का अभ्यास
बाल-गीत, पहाड़े और ए-बी-सी का गाना — बच्चों की पढ़ाई हमें क्या सिखाती है
ज़रा याद कीजिए: वर्णमाला का क्रम आपने कैसे सीखा था? और दो का पहाड़ा? लगभग सबका जवाब एक ही है — गाकर, लय में रटकर। तो फिर बड़े होकर हमने वह तरीक़ा इस्तेमाल करना क्यों छोड़ दिया?
गीत: लिपि से भी पुराना स्मृति-यंत्र
लिपि के प्रसार से बहुत पहले, लोग महाकाव्य, नियम और अनुष्ठान वाणी से आगे पहुँचाते थे। छंद, पाठ की स्वर-लय और श्रम-गीत लंबी सामग्री दोहराने के संकेत देते थे, हालांकि मौखिक परंपरा में बदलाव भी आ सकते थे।
बच्चों की शिक्षा में गीत उपयोगी हैं क्योंकि वे पढ़ना सीखने से पहले भी साथ दे सकते हैं और क्रम सुन सकते हैं। फिर भी गीत हर सामग्री का सर्वोत्तम माध्यम नहीं; उसे चित्र, बातचीत और वास्तविक उदाहरणों के साथ जोड़ना बेहतर है।
पहाड़े और ए-बी-सी का गाना सचमुच क्यों काम करते हैं
ए-बी-सी का गीत अक्षरों को छोटे वाक्यांशों में बाँधकर परिचित धुन पर रखता है। पहाड़े अक्सर अलग तरीका अपनाते हैं: संख्याओं को एक समान ताल में बार-बार बोलना, चाहे धुन हो या न हो। दोनों में ध्वनि का सहारा है, पर उनकी बनावट एक जैसी नहीं है।
कुछ वयस्क अगले अक्षर को याद करने के लिए मन में ए-बी-सी का गीत दोहराते हैं। उनके लिए धुन पुनर्स्मरण का संकेत है। दूसरे लोग दृश्य या शब्द-आधारित तरीका अपनाते हैं, और गीत अकेले अक्षरों का प्रयोग नहीं सिखाता।
बड़े लोगों ने गाना कब छोड़ा?
विषय अधिक विशिष्ट होने पर पढ़ाई में गीत कम दिखाई देते हैं। तैयार सामग्री घटती है और समझाने, गणना करने तथा निर्णय लेने जैसे काम बढ़ते हैं, जिन्हें गीत अकेला पूरा नहीं कर सकता। इसलिए वयस्कों के गाना छोड़ने का कोई एक कारण नहीं है।
फिर भी छोटी और क्रमबद्ध सूची को परिचित धुन या लय में आज़माया जा सकता है। इससे याद रहना तय नहीं होता, पर एक अतिरिक्त संकेत मिल सकता है। इसके बाद अर्थ समझाइए या कोई प्रश्न हल करके जाँचिए।